Monday, 19 February 2018

IC Mini Browser for Android

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IC Mini Browser for Android gives you a great browsing experience in a tiny package. 
It’s a lightweight browser especially useful to users of Android phones with lower specs and less storage space, 
but still packed with great features.

Main Features
★ Tiny Size
★ Navigation Cards
★ Fast Browsing
★ Smart Downloading
★ Control Videos with Gestures

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Saturday, 10 February 2018

आतंकी संगठन लश्कर ए तैय्यबा के लिये फंडिंग करते थे अंकित जैन, और आदेश गर्ग, NIA ने किया गिरफ्तार

आतंकी संगठन लश्कर ए तैय्यबा के लिये फंडिंग करते थे अंकित जैन, और आदेश गर्ग, NIA ने किया गिरफ्तार

मुजफ्फरनगर  शहर के सबसे चर्चित सर्राफ अरिहंत ज्वेलर्स का मालिक आतंकियों को फंडिंग करता था। सर्राफ आदिश जैन और अंकित गर्ग हवाला कारोबार से भी जुड़े थे। राष्ट्रीय जांच ऐजेंसी (एनआइए) ने दोनों को लखनऊ से दबोचकर पूरे मामले का राजफाश कर दिया।
खूंखार आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा को फंडिंग और हवाला कारोबार से जुड़े होने की सूचना पर तीन फरवरी को एनआइए के डिप्टी एसपी ने टीम के साथ अरिहंत ज्वेलर्स के मालिक आदिश जैन व दिनेश उर्फ अंकित गर्ग की दुकानों व मकानों पर छापेमारी की थी।
इस छापेमारी में अंकित गर्ग के मकान से 15 लाख कैश, पिस्टल, लैपटॉप और 4 मोबाइल व आदिश जैन के मकान व दुकान से 32 लाख कैश, चाइना मेड पिस्टल, 2 मोबाइल व 2 लैपटॉप बरामद किए गए थे। इतना ही छापेमारी में आदिश के यहां से भारी मात्रा में सऊदी अरब, कुवैत, जापान, अमेरिका आदि देशों की करेंसी बरामद हुई थी।छापेमारी के बाद से दोनों फरार चल रहे थे।
उधर, गुरुवार को एनआइए ने दोनों को लखनऊ में दबोच लिया। इससे पूर्व एनआइए ने महाराष्ट्र के औरंगाबाद निवासी आतंकी शेख अब्दुल नसीम को दबोचा था। जिससे पूछताछ के बाद दोनों सर्राफ के यहां छापेमारी की गई थी। इतना ही नहीं दोनों सर्राफ सऊदी अरब के सोना तस्करों के संपर्क में थे।
एनआइए को इसके पुख्ता सबूत मिले हैं। माना जा रहा है कि दोनों के खिलाफ पुख्ता सबूत मिलने पर गिरफ्तारी की गई है। एनआइए इस पूरे मामले में अभी तक 6 लोगों को दबोच चुकी है। दोनों सर्राफ के हवाला कारोबार व आतंकियों को फंडिंग करने की जानकारी होने पर सर्राफा बाजार में हड़कंप मचा है।
उधर, जनपद से बड़ी संख्या में लोग अरब देशों में नौकरी करते हैं जो चोरी छिपे विदेशों से सोने के बिस्कुट की तश्करी करते हैं। एनआइए ऐसे लोगों की कुंडली भी खंगाल रही है। इसके अलावा दो सर्राफ के हवाला कारोबार से जुड़ने पर खुफिया विभाग भी अलर्ट पर आ गया है। खुफिया विभाग ऐसे लोगों की कुंडली खंगाल रहा है जो विदेशों से सोना लाते समय कस्टम की जद में आ चुके हैं।

Friday, 26 January 2018

लाल किले पर पहला तिरंगा जनरल शाहनवाज खान ने ही फहराया था


लाल किले पर पहला तिरंगा जनरल शाहनवाज खान ने ही फहराया था


देश को गुलामी की बेड़ियों से आजाद करवाने के लिए हजारों देशभक्तों और सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी. इन महान देभक्तों में जनरल शाहनवाज खान का नाम बड़े आदर और मान से लिया जाता है. आजाद हिंद फौज के मेजर जनरल शाहनवाज खान महान देशभक्त, सच्चे सैनिक और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बेहद करीबियों में शुमार थे.
एक सच्चे और बहादुर सैनिक के साथ साथ जनरल खान एक सच्चे समाजसेवी और दूरदर्शी राजनीतिज्ञ भी थे. आजाद हिंद फौज के मेजर जनरल शाहनवाज खान का जन्म ब्रिटिश इंडिया में 24 जनवरी 1914 को गावं मटौर, जिला रावलपिंडी (अब पाकिस्तान) में झंझुआ राजपूत कैप्टन सरदार टीका खान के घर हुआ था. सैनिक परिवार में जन्में शाहनवाज ने अपने बुजुर्गों की राह पर चलने की ठानी. शाहनवाज की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा पाकिस्तान में हुई. आगे की शिक्षा उन्होंने प्रिंस ऑफ वेल्स रायल इंडियन मिलट्री कॉलेज देहरादून में पूरी की. 1940 में ब्रिटिश इंडियन आर्मी में एक अधिकारी के तौर पर ज्वाइन कर लिया.

समाज

  |  7-मिनट में पढ़ें  |   23-01-2018
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देश को गुलामी की बेड़ियों से आजाद करवाने के लिए हजारों देशभक्तों और सैनिकों ने अपने प्राणों की आहुति दी. इन महान देभक्तों में जनरल शाहनवाज खान का नाम बड़े आदर और मान से लिया जाता है. आजाद हिंद फौज के मेजर जनरल शाहनवाज खान महान देशभक्त, सच्चे सैनिक और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बेहद करीबियों में शुमार थे.
एक सच्चे और बहादुर सैनिक के साथ साथ जनरल खान एक सच्चे समाजसेवी और दूरदर्शी राजनीतिज्ञ भी थे. आजाद हिंद फौज के मेजर जनरल शाहनवाज खान का जन्म ब्रिटिश इंडिया में 24 जनवरी 1914 को गावं मटौर, जिला रावलपिंडी (अब पाकिस्तान) में झंझुआ राजपूत कैप्टन सरदार टीका खान के घर हुआ था. सैनिक परिवार में जन्में शाहनवाज ने अपने बुजुर्गों की राह पर चलने की ठानी. शाहनवाज की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा पाकिस्तान में हुई. आगे की शिक्षा उन्होंने प्रिंस ऑफ वेल्स रायल इंडियन मिलट्री कॉलेज देहरादून में पूरी की. 1940 में ब्रिटिश इंडियन आर्मी में एक अधिकारी के तौर पर ज्वाइन कर लिया.
shahnawaz, Azad hind fauz, freedomशाहनवाज ने आजाद हिंद फौज का नाम रौशन किया
जब जनरल शाहनवाज ब्रिटिश आर्मी में शामिल हुए थे, तब विश्व युद्ध चल रहा था और उनकी तैनाती सिंगापुर में थी. जापानी फौज ने ब्रिटिश इंडियन आर्मी के सैंकड़ों सैनिकों को बंदी बनाकर जेलों में ठूंस दिया था. 1943 में नेता जी सुभाष चंद्र बोस सिंगापुर आए और उन्होंने आजाद हिंद फौज की मदद से इन बंदी सैनिकों को रिहा करवाया. नेताजी के ओजस्वी वाणी और जोशीले नारे ‘तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा’ से प्रभावित होकर शाहनवाज के साथ सैंकड़ों सैनिक आजाद हिन्द फौज में शामिल हो गए और भारत माता की मुक्ति के लिए अंग्रेजों से लोहा लेने लगे. शाहनवाज खान के देशभक्ति और नेतृत्व क्षमता से प्रभावित होकर नेताजी ने उन्हें आरजी हुकूमत-ए-आजाद हिंद की कैबिनेट में शामिल किया था. दिसंबर 1944 में जनरल शाहनवाज को नेता जी ने मांडले में तैनात सेना की टुकड़ी का नम्बर 1 कमांडर नियुक्त किया था. सितंबर 1945 में नेता जी आजाद हिंद फौज के चुनिंदा सैनिकों को छांटकर सुभाष ब्रिगेड बनायी थी, जिसका कमांड नेताजी ने जनरल शाहनवाज के हाथ सौंपी थी. इस ब्रिगेड ने कोहिमा में अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ मोर्चा संभाला था. संयुक्त सेना सेकेंड डिविजन का कंमाडर बनाकर बर्मा के मोर्च पर भेजा.
ब्रिटिश आर्मी से लड़ाई के दौरान बर्मा में जनरल शाहनवाज खान और उनके दल को ब्रिटिश आर्मी ने 1945 में बंदी बना लिया था. नवंबर 1946 में मेजर जनरल शाहनवाज खान, कर्नल प्रेम सहगल और कर्नल गुरुबक्श सिंह के खिलाफ दिल्ली के लाल किले में अंग्रेजी हकूमत ने राजद्रोह का मुकदमा चलाया. लेकिन भारी जन दबाव और समर्थन के चलते ब्रिटिश आर्मी के जनरल आक्निलेक को न चाहते हुए भी आजाद हिंद फौज के अफसरों को अर्थदण्ड का जुर्माना लगाकर छोड़ने पर विवश होना पड़ा.
जनरल शाहनवाज खान और बाकी अफसरों की पैरवी सर तेज बहादुर सप्रू, जवाहर लाल नेहरु, आसफ अली, बुलाभाई देसाई और कैलाश नाथ काटजू ने की थी. 1946 में आजाद हिंद फौज की समाप्ति के बाद जनरल शाहनवाज खान ने महात्मा गांधी और पंडित जवाहर लाल नेहरू के प्रेरणा से इंडियन नेशनल कांग्रेस में शामिल हो गये. 1947 में प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने जनरल शाहनवाज खान को कांग्रेस सेवा दल के सदस्यों को सैनिकों की भांति प्रशिक्षण और अनुशासन सिखाने की अहम जिम्मेदारी सौंपी. जनलर खान को कांग्रेस सेवा दल के सेवापति का पद नवाजा गया, जिसका निर्वाहन उन्होंने वर्ष 1947 से 1951 तक किया था, और अपने जीवन के अंतिम दिनों में भी वह 1977 से 1983 तक कांग्रेस सेवा दल के प्रभारी बने रहे.
1952 में पहले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर मेरठ से चुनाव जीते. इसके बाद वर्ष 1957, 1962 व 1971 में मेरठ से लोकसभा चुनाव जीता. मेरठ लोकसभा सीट से प्रतिनिधित्व करने वाले जनरल शाहनवाज खान 23 साल केंद्र सरकार में मंत्री रहे. 1952 में चुनाव जीतने के बाद वह पार्लियामेंट्री सेक्रेटी और डिप्टी रेलवे मिनिस्टर बने. 1957-1964 तक वह केन्द्रीय खाद्य एवं कृषि मंत्री के पद पर रहे. 1965 में कृषि मंत्री एवं 1966 में श्रम, रोजगार एवं पुर्नवास मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली. 1971 से 1975 तक उन्होंने पेट्रोलियम एवं रसायन और कृषि एवं सिंचाई मंत्रालयों की बागडोर संभाली. 1975 से 1977 के दौरान वह केन्द्रीय कृषि एवं सिंचाई मंत्री के साथ एफसीआई के चेयरमैन का उत्तदायित्व भी उन्होंने संभाला. मेरठ जैसे संवेदनशील शहर का दो दशकों से अधिक प्रतिनिधित्व जनरल खान ने किया और उनके कुशल नेतृत्व और सबको साथ लेकर चलने की नीति के कारण शहर में कभी कोई दंगा फसाद नहीं हुआ, जो एक मिसाल है. 1956 में भारत सरकार ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस की नेताजी की मौत के कारणों और परिस्थितियों के खुलासे के लिए एक कमीशन बनाया था, जिसके अध्यक्ष जनरल शाहनवाज खान थे.
जनरल शाहनवाज खान शुरू में नेताजी सुभाष चंद्र बोस से प्रभावित हुए तो बाद में गांधी जी के साथ रहे. पंडित नेहरु ने उन्हें ‘खान’ की उपाधि से नवाजा. जनरल शाहनवाज के पीए रहे मतीन बताते हैं कि छठें लोकसभा चुनाव में जब मेरठ से उनके बजाय मोहसिना जी को टिकट दिया गया तो उन्होंने मोहसिना जी के साथ जाकर नामांकन कराया. वह सबके सुख-दुख में शामिल होते थे. जनरल शाहनवाज के पोते आदिल शाहनवाज बताते हैं कि, ‘रेलवे का एक कर्मचारी बिना अवकाश घर चला गया तो उसे सस्पेंड कर दिया गया. जनरल साहब ने तब कैबिनेट मंत्री लाल शास्त्री जी से कहा. उन्होंने गंभीरता से नहीं लिया. इस पर उन्होंने अगले दिन अपना इस्तीफा भेज दिया. शास्त्री जी ने कारण पूछा तो बोले कि ‘अगर अवाम के लिए काम करने लायक नहीं हूं तो इस कुर्सी पर बैठने का मुझे हक नहीं है.
आजाद हिन्दुस्तान में लाल किले पर ब्रिटिश हुकूमत का झंडा उतारकर तिरंगा लहराने वाले जनरल शाहनवाज ही थे. देश के पहले तीन प्रधानमंत्रियों ने लालकिले से जनरल शाहनवाज का जिक्र करते हुए संबोधन की शुरुआत की थी. आज भी लालकिले में रोज शाम छह बजे लाइट एंड साउंड का जो कार्यक्रम होता है, उसमें नेताजी के साथ जनरल शाहनवाज की आवाज है. प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष सेवानिवृत्त न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू ने जनरल खान की देश के प्रति निष्ठा और राष्ट्रनिर्माण में अग्रणी भूमिका को देखते हुए भारत सरकार से जनरल खान को भारत रत्न देने की मांग की थी. डाक विभाग महान स्वतंत्रा सेनानी जनरल शाहनवाज खां, कर्नल प्रेम चंद और कर्नल गुरुबख्शक पर डाक टिकट जारी कर चुका है.

Thursday, 25 January 2018

पढ़िए: पैगम्बर मुहम्मद साहब (सल्ल.) ने कहा था कि जिस देश में रहो, उससे मुहब्बत करो !

पढ़िए: पैगम्बर मुहम्मद साहब (सल्ल.) ने कहा था कि जिस देश में रहो, उससे मुहब्बत करो !

मैं इतिहास में सबकुछ जानने का दावा नहीं कर सकता लेकिन जितना जान सका हूं उसके आधार पर मुझे अतीत की एक महान घटना एेसी नजर आती हैं जब विजेता ने लाशों पर फतह नहीं पार्इ, अपनी जीत का जश्न नहीं मनाया आैर किसी कमजोर का गला नहीं दबाया। बल्कि युद्घ जीतकर भी उन्होंने लोगों का दिल जीत ललिया।
घटना है पैगम्बर मुहम्मद साहब (सल्ल.) के जीवन की। हिजरत के कर्इ साल बाद वे मदीने से मक्का आए थे। एक वह दौर था जब मक्का के लोग उनकी जान के प्यासे हो गए। तब भी उन्होंने युद्घ का मार्ग नहीं अपनाया।उनके चाचा अबू तालिब गुजर चुके थे, उनकी बीवी खदीजा का भी स्वर्गवास हो चुका था। मां आैर बाप ताे बहुत पहले गुजर चुके थे। वे बिल्कुल अकेले पड़ चुके थे तब मक्का के कुरैश उनसे बदला लेने काे तैयार हुए। वे हर कीमत पर उनकी जान लेने को आमादा थे।
एेसे में पैगम्बर मुहम्मद साहब (सल्ल.) को अपने रब की आेर से हुक्म हुआ आैर वे मक्का छोड़कर शांतिपूर्वक मदीना चले गए। मदीना के लोगों ने उनका दिल खोलकर स्वागत किया मगर मक्का के कुरैश यह भी नहीं चाहते थे।उनकी मंशा थी कि मुहम्मद (सल्ल.) को खत्म कर दिया जाए। वे फौज लेकर मदीना की आेर चल पड़े तब अपने साथियों, उनके बीवी-बच्चों आैर आत्मरक्षा के लिए पैगम्बर मुहम्मद साहब (सल्ल.) ने रणभूमि की आेर प्रस्थान किया तथा वे विजयी हुए।
मक्का के लोगों ने उनके साथ जितना दुष्टता का बर्ताव किया था मदीना के लोग उतने ही हमदर्द थे। उन्होंने हर कदम पर उनका साथ दिया आैर कोर्इ भी संकट वे सबसे पहले खुद पर लेना चाहते थे लेकिन मुहम्मद साहब (सल्ल.) को खुद से ज्यादा अपने साथियों की फिक्र रहती।
मुहम्मद (सल्ल.) को मक्का की धरती से भी बहुत प्रेम था। यही वो जगह थी जहां उनकी प्यारी मां आमिना, पिता अब्दुल्लाह के कदम पड़े थे। इसी धरती पर काबा था जहां इबादत करना उनका सबसे बड़ा खाब था।… आैर अपनी मातृभूमि किसे अच्छी नहीं लगती? मदीने में उन्हें वैसी तकलीफ नहीं थी जैसी मक्का के लोगों ने दी थी। फिर भी
उनका मन हमेशा वहां जाने के लिए उत्सुक रहता था।
देशप्रेम क्या होता है? मुझे यह बताने की आवश्यकता नहीं, क्योंकि हर देश में महान देशप्रेमी हुए हैं, अमर बलिदानी पैदा हुए हैं। मैं पैगम्बर मुहम्मद साहब (सल्ल.) को भी उसी श्रेणी का एक महान देशप्रेमी मानता हूं जिन्होंने अपने वतन के लिए कर्इ कुर्बानियां दीं। उनके कर्इ साथी जंग में शहीद हुए।
मक्का उनका घर था आैर वहां जाने का उन्हें पूरा हक था लेकिन कुरैश नहीं चाहते थे कि वे पूरी जिंदगी में कभी वहां लौटकर आएं। मुहम्मद साहब (सल्ल.) के पास संसाधन नहीं थे, बहुत बड़ी सेना नहीं थी, लेकिन वे सिर्फ दो बातों के दम पर मैदान में डटे रहे। न सिर्फ डटे रहे बल्कि दुश्मनों को शिकस्त भी दी। इनमें पहली बात थी – ईश्वर और उसकी न्यायप्रियता पर अटूट भरोसा, और दूसरी – सच्चाई।
जब आप अपने बहादुर साथियों के साथ वापस मक्का आए तो उन लोगों में भारी भय था जिन्होंने आपको तकलीफें दी थीं। मक्का बिल्कुल सामने था और आप आगे बढ़ते जा रहे थे। उधर मक्का के लोगों के मन में कई आशंकाएं थीं।
तब मुहम्मद साहब (सल्ल.) ने एक व्यक्ति अबू सुफियान से कहा – अपनी कौम में जाओ और उनसे कहो – मुहम्मद मक्का में एक अच्छे भाई की तरह दाखिल होगा। आज न कोई विजयी है और न पराजित। आज तो प्रेम और एकता का दिन है। आज चैन और सुकून का दिन है। अबू सुफियान के घर में जो दाखिल हो जाए, उसे अमान (शरण) है। जो घर का दरवाजा बंद कर ले उसको अमान है और जो काबा में दाखिल हो जाए, उसको भी अमान है।
अबू सुफियान ने यह बात मक्का में जाकर कही तो लोगों में खुशी की लहर दौड़ गई। मुहम्मद साहब (सल्ल.) मक्का में दाखिल हुए। फिर आपने काबा जाने का इरादा किया। काबा की चाबी मंगाई और आप काबा गए।
काबा के बाहर मक्कावालों की भीड़ लगी थी। वे लोग आज अपनी किस्मत का फैसला सुनने खड़े थे। तब आपने कुरैश के लोगों की ओर नजर उठाई और पूछा, कुरैश के लोगो, जानते हो मैं तुम्हारे साथ क्या करने वाला हूं?
सब बोले- अच्छा व्यवहार। आप अच्छे भाई हैं और अच्छे भाई के बेटे हैं।
फिर आपने फरमाया – आज तुम्हारी कोई पकड़ नहीं। जाओ, तुम सब आजाद हो।
मुहम्मद साहब (सल्ल.) ने उन लोगों को आजाद कर दिया जिन्होंने कभी उन्हें बहुत तकलीफें दी थीं। आज आप शक्ति के शिखर पर थे, लेकिन उन लोगों को भी माफ कर दिया जो आपको दुनिया से मिटाना चाहते थे। युद्घ जीतकर दिल जीतने तथा शक्ति के साथ माफी के एेसे उदाहरण इतिहास में बहुत कम मिलते हैं।

Tuesday, 23 January 2018

तीन तलाक़ के बहाने मोदी सरकार शरीयत को निशाना बना रही है: असदउद्दीन ओवैसी

तीन तलाक़ के बहाने मोदी सरकार शरीयत को निशाना बना रही है: असदउद्दीन ओवैसी

नई दिल्‍ली: ऑल इण्डिया मजलिस ऐ इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष बैरिस्टर असदउद्दीन ओवैसी ने तीन तलाक के मुद्दे पर मोदी सरकार के रुख की मुखालफत करते हुए कहा है कि इस मसले पर महिलाओं को न्‍याय दिलाने की बात कहना तो महज एक बहाना है दरअसल इनका असली निशाना शरियत है. इसके साथ ही उन्‍होंने तीन तलाक से पीडि़त महिलाओं की गुजर-बसर के लिए हर महीने 15 हजार रुपये के बजटीय प्रावधान की बात भी कही।
ओवैसी के मुताबिक सरकार को बजट में यह सुनिश्चित करना चाहिए कि जिन महिलाओं को तीन तलाक दिया गया है, उनको हर महीने 15 हजार रुपये गुजारे के लिए मिले. उन्‍होंने पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहा कि 15 लाख नहीं तो 15 हजार ही दे दो मित्रों. उल्‍लेखनीय है कि तीन तलाक संबंधी बिल पिछले शीतकालीन सत्र के दौरान लोकसभा में पास हो चुका है लेकिन राज्‍यसभा में पारित नहीं हो सका।
‘पद्मावत’ का विरोध
इसी तरह बॉलीवुड की विवादित फिल्म ”पद्मावत” को बकवास बताते हुए एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने मुस्लिमों से कहा है कि वह इसे देखने पर समय बर्बाद न करें. हैदराबाद से लोक सभा के सदस्य ओवैसी ने बुधवार को वारंगल जिले में एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, ”फिल्म देखने न जाएं. ईश्वर ने आपको दो घंटे की फिल्म देखने के लिए नहीं बनाया है.”
उन्होंने कहा, ”नरेंद्र मोदी (प्रधानमंत्री) ने उस फिल्म के लिए 12 सदस्यों की एक समिति गठित की.. (लेकिन) किसी ने भी हमारे खिलाफ कानून (तीन तलाक खत्म करने) बनाते वक्त हमसे राय-मशविरा नहीं किया.’

ओवैसी ने कहा, ”फिल्म बहुत बुरी और बकवास है..मुस्लिम समुदाय को राजपूतों से सीखना चाहिए जो फिल्म को रिलीज नहीं होने देने के लिए एकजुट हैं.”
हज सब्सिडी को समाप्‍त करने के सरकार के फैसले पर भी पिछले दिनों ओवैसी ने निशाना साधा. बीजेपी द्वारा इसे मुस्लिमों का तुष्टिकरण और वोट बैंक बताने पर हमला करते हुए एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा था कि उत्तर प्रदेश में पार्टी की सरकार ने तीर्थयात्रा के लिए धन दिया है और वह जानना चाहते हैं कि क्या इसे बंद किया जा सकता है. ओवैसी ने दावा किया कि कुंभ मेले के लिए भी धन दिया जाता है जबकि कर्नाटक की कांग्रेस सरकार चारधाम यात्रा के लिए अनुदान देती है. उन्होंने कहा कि काफी पहले उन्होंने खुद ही हज सब्सिडी को खत्म करने की मांग की थी।
ओवैसी ने ट्वीट किया था, ”इस वर्ष हज सब्सिडी 200 करोड़ रुपये है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक 2022 तक यह खत्म होना चाहिये था. 2006 से मैं मांग करता रहा हूं कि इसे खत्म किया जाना चाहिए और इस राशि का इस्तेमाल मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा में होना चाहिए.

Friday, 19 January 2018

दुनिया के मशहूर खिलाड़ी बिल विलियम्स इस्लाम कुबूल करके उमराह करने मक्का पहुँचे

दुनिया के मशहूर खिलाड़ी बिल विलियम्स इस्लाम कुबूल करके उमराह करने मक्का पहुँचे

नई दिल्ली: दुनिया का मशहूर 31 वर्षीय न्यूजीलैंड के रग्बी खिलाड़ी सोनी बिल विलियम्स ने साल 2008 में इस्लाम महजब को अपनाया था। वह ऑल ब्लैक के लिए खेलने वाले पहले मुस्लिम हैं। विलियम्स ने इस्लामिक उमरा करने के मक्का की यात्रा की।
ऑल ब्लैक स्टार ने सुपर रग्बी टीम द ब्लूज़ के साथ प्रेसिजन ट्रेनिंग शुरू करने से पहले सऊदी अरब की यात्रा की। उन्होंने मक्का की खुद की तस्वीरें पोस्ट की हैं और इस क्षण को अद्भुत बताया है। विलियम्स ने कहा कि वे बगही कब्रिस्तान गए और इस्लामी इतिहास में कुछ महानतम लोगों के लिए दुआ की। यह यात्रा प्रसिद्ध हज के बजाय एक उमरा यात्रा थी। हज करना इस्लाम के पांच सिद्धांतों में से एक है
यात्रा करने से पहले विलियम्स ने 2018 रग्बी सीजन के लिए तैयारी के सिलसिले में दोस्त क्वेड कूपर के साथ एक महीने का प्रशिक्षण दिया

नज़रियाः सरकार को सिर्फ मुस्लिम महिलाओं की ही चिंता क्यों, देश की सभी महिलाओं की चिंता क्यों नहीं ?

     

    नज़रियाः सरकार को सिर्फ मुस्लिम महिलाओं की ही चिंता क्यों, देश की सभी महिलाओं की चिंता क्यों नहीं ?

तीन तलाक के खिलाफ कानून बनाना और हज सब्सिडी खत्म करना, दोनों ऐसे फैसले हैं जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद सरकार की ओर से लिए गए। तीन तलाक तो ख़ैर सीधे मुस्लिम महिलाओं से जुड़ा था. सरकार ने हज सब्सिडी खत्म करने के फैसले को भी मुस्लिम लड़कियों के साथ जोड़ दिया, ये कहते हुए कि हज सब्सिडी ख़त्म करने से बचा पैसा मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा पर किया जाएगा, अब ये बात अलग है कि सरकारी स्कूलों में लड़कियों की शिक्षा पहले से ही मुफ़्त है।
सुप्रीम कोर्ट की पहल को ऐसे दिखाना कि सरकार ने ही ये फैसले किए हैं और मुस्लिम महिलाओं की वही सबसे बड़ी खैरख्वाह है. 2019 आम चुनाव के मद्देनजर एक नया वोट बैंक जोड़ने की कोशिश में इसे ख़ालिस सियासी कवायद माना जा सकता है. समाज कोई भी हो वो पुरुष, महिलाओं और यहां तक कि थर्ड जेंडर सभी से मिल कर बना होता है.
किसी एक ही हिस्से के बारे में सोचा जाए तो वो समाज सही मायने में आगे नहीं बढ़ सकता. पिछड़ा और विकास से अगर अछूता होता है तो वो पूरा परिवार होता है. खुशहाल होता है तो भी पूरा परिवार होता है. परिवार के सदस्यों को उनके जेंडर के हिसाब से अलग नहीं बांटा जा सकता.
ये सच है कि मुस्लिम महिलाओं को उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है. लेकिन क्या दूसरे धर्मों में महिलाओं के साथ ये बिल्कुल नहीं होता. समस्या धर्मविशेष से जुड़ी नहीं है बल्कि समूचे समाज की पुरुष प्रधान सोच में है. ज़रूरत है तो इस स्थिति को देश में सर्वत्र बदलने की है चाहे वो घर हो या काम करने की जगह सरकार को सिर्फ मुस्लिम महिलाओं चिंता ही क्यों, देश की सभी महिलाओं की क्यों नहीं.
अगर वो सच में सभी महिलाओं की भलाई चाहती है तो और सब काम छोड़ सबसे पहले महिला आरक्षण बिल को पास कराए. अगर संसद में कोई राजनीतिक दल इस काम में रोड़े अटकाता है तो सरकार अध्यादेश के रूट से महिलाओं के लिए आरक्षण को कानूनी जामा पहनाए. क्या ऐसा हो पाएगा ?

Hazrate Bilaal Al-Habashi (Razi’Allahu Anhu) ….

⭐ Hazrate Bilaal Al-Habashi (Razi’Allahu Anhu) ….


» Alqab: Sayyedul Muazzin, Muazzin-e-Awwal.
» Wiladat: 580 C.E. Me Makka Me Hui.
Aap Ke Waalidain Abyssinia (Ethiopia, Africa) Ke Hain.
Aap Ke Waalid Ka Naam Rabah Aur Waalida Ka Naam Hamamah Hai.
Aap Ne 30 Baras Ki Umr Me Jab Islam Apnaya Tou Shuru Me Makhafi Rakha. Jab Aap Ke Maalik Umayyah Ibn Khalaf Ko Pata Chala Tou Uss Ne Aap Ko Tarah Tarah Ki Taklif Dena Shuru Kiya. Wo Aap Ko Garm Ret Par Letakar Aap Ke Upar Bade Bhari Patthar Rakta Tha. Lekin Hazrate Bilaal Ne Islam Ko Na Chhoda Aur Apne Mohabbate Rasoll Ka Saboot Diya.
Phir Huzoor (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ke Hukm Par Hazrate Abu Bakr Siddeeq (Razi’Allahu Anhu) Ne Umayyah Ibn Khalaf Ko Dusra Gulam Aur Kuchh Raqam Dekar Aap Ko Aazad Karaya.
Jab Hazrte Abu Baqr Aap Ko Lekar Ja Rahe The Tab Umayyah Ibn Khalaf Ne Kaha ‘Aye Abu Baqr, Tum Ne Bahut Mahenga Sauda Kiya.’ Tou Hazrte Abu Baqr Ne Uss Se Kaha ‘Tum Ne Sirf Bilaal Ko Dekha Hai Aur Maine Uske Dil Me Mohabate Rasool Ko Dekha Hai.’
622 C.E. Me Huzoor (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ke Madeena Aane Ke Baad Aap Bhi Makka Se Hijrat Karke Madeena Aa Gaye.
» Aap Ki Biwi Ka Naam Hind Hai.
» Aap Ne Jange Badr Aur Dusri Tamam Jang Me Shirkat Ki. Jange Badr Me Aap Ne Umayyah Bin Khalaf Ko Qatl Kar Diya.
» Aap Islam Ke Sab Se Pehle Muazzin Hain.
2 Hijri Me Jab Hazrate Umar (RaziAllahu Anhu) Ne Huzoor (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ne Namaaz Ke Liye Musalmano Ko Jama Karne Ke Liye Azaan Pukarne Ka Mashwara Diya. Tou Huzoor (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ne Hazrate Bilaal Ko Muazzin Muqarrar Kiya.
» Aap Hamesha Huzoor (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ke Saath Rehte They, Masjid-e-Nabawi Me Ya Masjid-e-Quba Me Ya Safar Me, Aur Aap Ki Azaan Ki Aawaz Se Ashaba Ko Pata Chal Jaata Tha Ke Huzoor (Sallallahu Alaihay Wasallam) Kis Maqaam Par Hai.
Jab Makka Fateh Hua Tou Aap Ne Ka’abatullah Par Azaan Pukari.
» Huzoor (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ne Aap Ko Apna Khajanchi Muqarrar Kiya Tha Aur Jab Koi Shakhs Apni Haajat Lekar Darbare Nabi Me Aata Tha Tou Aap Hazrate Bilaal Ko Uske Liye Hukm Dete The Aur Wo Usey Uski Haajat Ki Chiz Dete The.
» Hiqayat: Ek Baar Huzoore Akram (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ne Fajr Ke Waqt Hazrat-e-Bilaal Se Farmaya Ke ‘Aye Bilaal, Ye Batao Ke Eimaan Laane Ke Baad Tum Ne Wo Kaun Sa Aisa Amal Kiya Hai Jo Fazeelat Me Dusre Amal Se Badhkar Hai. Kyun Ke Maine Ye Khushkhabri Suni Hai Ke Tum Jannat Me Daakhil Hone Wale Ho.’
Unho Ne Kaha ‘Ya Rasool’Allah (Sallallahu Alaihay Wasallam)! Mujhe Aisa Koi Amal Yaad Nahi Aata,’ Phir Kuchh Der Baad Aap Ne Kaha ‘Aye Mere Aaqa, Mai Jab Bhi Wuzu Karta Hu, Chahe Din Me Ya Raat Me, Tou Fouran Mai Tahyatul Wuzu Ki Namaaz Padhta Hu Aur Jab Bhi Mera Wuzu Toot Jaata Hai Tou Mai Fouran Wuzu Kar Liya Karta Hu.’
Huzoore (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ne Farmaya Ke ‘Aye Bilaal, Ye Hi Wo Amal Ho Sakta Hai, Jis Ki Wajah Se Ye Khushkhabari Mili Hai.’
» Huzoor (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ke Parda Farmane Ke Baad Hazrate Abu Bakr (RaziAllahu Anhu) Ke Ilteja Karne Par Hazrate Bilal Madeena Me Rooke.
Lekin Aap Ke Wisal Ke Baad Hazrate Umar Farooq Ke Zamane Me Hazrate Bilaal Ne Unn Se Jihaad Ke Jaane Ki Ijazat Chahi. Aap Ne Madeena Me Rookne Ki Guzarish Ki Magar Hazrate Bilaal Na Mane Aur Shaam (Syria) Ki Taraf Rawana Ho Gaye.
» Ameerul Mo’minin Hazrate Umar Farooq (RaziAllahu Anhu) Jab Jerusalem Gaye Tou Waha Hazrate Bilaal Maujood The Aur Ashaba Ke Arz Karne Par Aap Ne Unko Azaan Ke Liye Guzarish Ki. Shuru Me Mana Karne Ke Baad Jab Hazrate Bilaal Ne Azaan Pukari Tou Sab Ko Huzoor (Sallallahu Alaihay Wasallam) Ke Zamana-e-Zaahiri Ki Yaad Aa Gai.
» Wisaal: Aap Ka Wisal 21 Moharram 18 Hijri (2 March 640 C.E.) Ko 60 Baras Ki Umr Me Hua.
Aap Ka Mazaar Damascus (Shaam /Syria) Me ‘Baab-Us Sagheer’ Me Hai.
**** @[156344474474186:] *****
Allah Ta’ala Hume Mukammal Mohabbate Rasool Ata Farmae Aur Sab Ke Emaan Ki Hifazat Farmaye Aur Sab Ko Nek Amal Karne Ki Taufiq Ata Farmaye.
Aur Sab Ko Duniya Wa Aakhirat Me Kaamyabi Ata Farmaye Aur Sab Ki Nek Jaiz Murado Ko Puri Farmae. Aameen.

Wednesday, 17 January 2018

हज सब्सिडी खत्म, लेकिन कैलाश मानसरोवर यात्रा पर 1 लाख क्यों?

      हज सब्सिडी खत्म, लेकिन कैलाश                           मानसरोवर यात्रा पर 1 लाख क्यों?



नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार मुस्लिमों को मिलने वाली हज सब्सिडी को पूरी तरह से खत्म कर दिया है. हज सब्सिडी खत्म करने के लिए पिछले कई सालों से मुस्लिम समुदाय के लोग मांग भी कर रहे थे. मुस्लिमों का आरोप था कि हज सब्सिडी का फायदा मुस्लिमों को ना मिलकर एयर इंडिया और दूसरे राजनीतिक रसूख के लोग उठाते थे.
वहीं केंद्र सरकार के इस फैसले के बाद एक बार फिर राजनीति तेज हो गई है. दरअसल मुस्लिम हज सब्सिडी खत्म करने का स्वागत कर रहे हैं. वहीं विपक्षी पार्टियों ने इस फैसले के बाद योगी सरकार को आड़े हाथों लेना शुरू कर दिया. दरअसल यूपी की योगी सरकार कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए 1 लाख रुपए का अनुदान देती है. जिसके बाद विपक्षी सवाल उठा रहे हैं कि अगर हज सब्सिडी खत्म करना सही है, तो फिर कैलाश मानसरोवर यात्रा पर पैसा देना क्या सही है.
एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने हज सब्सिडी को खत्म करन के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हज सब्सिडी को खत्म करना मुसलमानों के लिए फायदेमंद है. ओवैसी 2006 से हज सब्सिडी को खत्म करने की मांग उठाते रहे हैं. ओवैसी का कहना है कि हज सब्सिडी के बहाने एयर इंडिया को फायदा पहुंचाया जाता रहा है.
वहीं ओवैसी ने सवाल उठाते हुए कहा कि हज सब्सिडी खत्म करना सही फैसला है तो क्या यूपी की योगी सरकार अब कैलाश मानसरोवर यात्रा पर दिए जाने वाले एक लाख के अनुदान को खत्म करेगी. ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि विपक्ष कहना है कि कैलाश मानसरोवर यात्रियों को पैसा हज सब्सिडी दिए जाने के विरोध दिया गया था. हालांकि योगी सरकार ने इसे कैबिनेट से प्रस्ताव पास कर फैसला दिया था.

सीएम योगी के मंदिर परिसर में हुआ अश्लील डांस, भीड़ जुटाने के लिए नचाई बार बालाएं

NATIONAL

सीएम योगी के मंदिर परिसर में हुआ अश्लील डांस, भीड़ जुटाने के लिए नचाई बार बालाएं*******



                                 गोरखपुर।


सीएम योगी के आवास से सटे ग्राउंड में लगे मेले में लडकियों का अश्लील डांस कराया गया. जी हां गोरखपुर के गोरखनाथ मंदिर में सालों से लगे खिचड़ी के मेले में तमाम प्रकार के जादू के आयोजन किये जा रहे हैं, जिसमे जादू की आड़ में डांस का खेल चल रहा है, शायद प्रदेश के मुख्यमंत्री को इस बात की जानकारी नहीं, वरना इस तरह के नजारे नहीं देखने को मिलते |
गोरखनाथ मंदिर परिसर में खिचड़ी मेले में जादू के नाम पर दर्शको की भीड़ के लिए लडकियों का डांस परोसा जा रहा है, गोरखनाथ मंदिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का निवास स्थान भी है, और यहां पर पारंपरिक मेले का आयोजन वर्षों से होता चला रहा है, और ये मेला एक महीने तक चलता है, इस बार मेले में कुछ ऐसा देखने को मिला जो मंदिर में नहीं होना चाहिए, क्योंकि मंदिर एक आस्था और श्रद्धा का केंद्र है, आस्था और श्रद्धा के साथ बार बालाओं का डांस करा कर खिलवाड़ किया जा रहा है,
आपको बता दें कि गोरखनाथ मंदिर के प्रशासन की तरफ से इन लोगों को मेले में जगह दी जाती है, जिसका मंदिर प्रशासन की तरफ से पैसा भी लिया जाता है, और जादू के नाम पर अश्लील डांस का यह खेल मंदिर मेले में खुलेआम चल रहा है |
वहीं मेले में आए हुए कुछ लोगों से जब इस अश्लील लड़की के बारे में बात किया गया तो उन्होंने साफ तौर से कहा कि मंदिर एक पवित्र स्थान है, और यहां हम परिवार के साथ आते हैं, यह पूरी तरीके से गलत है, या आस्था के साथ खिलवाड़ है इस पर मंदिर प्रशासन को ध्यान देना चाहिए अगर इस तरह की गलत चीजें यहां हो रही है |
निश्चित रूप से मंदिर परिसर में मेले के दौरान इस तरह के कार्यक्रम और डांस का होना अपने आप में सवाल खड़े करता है, क्योकि ये जगह प्रदेश के मुख्यमंत्री का है, अब इस तरह के आयोजनों को पुलिस प्रशासन के साथ साथ मंदिर में मौजूद जिम्मेदार लोगो को भी देखना चाहिए था, ताकि मंदिर की आस्था और श्रधा बरकार रहे |



Monday, 15 January 2018

•हिंदू शब्द का सच्चा इतिहास •

                  •हिंदू शब्द का  सच्चा इतिहास •

हिंदू यह भारतीय मातृभाषा गुजराती, मराठी शब्द नही,
हिंदी भी नही वैसे यह
संस्कृत भी नही,
ईंग्लिश भी नही
मगधी भी नही एवं यह शब्द भारतीय भाषा समुदाय का भी नही..

यह शब्द "परशियन" "फारशी" शब्द है..

इ.स. १२वीं शताब्दी में मुगल जब भारत में आए. उनकी बोली भाषा व लिपी 'परशियन' 'फारशी' थी.
भारत में आकर जब उन्होंने भारतीयों को, भारत के तिलकधारी, तलवार धारी  व व तराजुधारी लोगों को हराया तब उन्होंने हारे हुए लोगों को   "हिंदू" यह तुच्छास्पद गाली देकर नवाजा तब से आजतक  "हिंदू" शब्द प्रचलित हुआ.

{ भारत के पश्र्चिम बंगाल राज्य की राजधानी कलकत्ता में विशाल पुस्तकालय लायब्ररी में परशियन डिक्शनरी है उसमें "हिंदू" शब्दा का अर्थ आप भी देख सकते हैं.}

( Analysis of  हिंदु:-

परशियन डिक्शनरी में  "हिंदू" शब्दा का अर्थ
हिनदू = गुलाम, चोर, पसीने की बदबू वाला, काले मुख वाला.
"हिंदू" यह शब्द दो शब्दा का बना हुआ नहीं तीन शब्दा का {हि+न+दू} एसा है जिसका अपभ्रंश होकर दो शब्द "हिंदू" एसा हो गया है.)

< दयानंद सरस्वती स्वयं १८७५ को मान्य करता है व उसके "सत्यार्थ  प्रकाश"  पुस्तक में 'हिंदू यह मुगलों ने थी हुई  गाली हे' एसा लिखा है..

इसके अलावा कि हिंदू समाज की स्थापन न करते हुए,  " *आर्य समाज " की स्थापन करता है.>

बाद में "हिंदू" से 'हिंदूस्थान' मुगलो ने ही किया..

( Analysis of  हिंदुस्तान :-
हिन = यानिकि तुच्छ, दरिद्र, पसीने की बदबू वाला.
दून= यानाकि लोग, प्रजा, जनता..
स्तान (स्थान)= यानिकि ठिकाना, अता-पता , जागा..)

"भारत" कमी भी 'हिंदूस्थान' नहीं था और नहीं है.

इ.स १२ वीं शताब्दी के पहले "हिंदू" शब्द किसी भी  ग्रंथ, बोलने में वा लिखने में नही आया, इसीलिए तो नीचे बताए गये
(ब्राह्मण ग्रंथ - रामायण, महाभारत, उपनिषद, भगवत गीता, ज्ञानेश्वरी, श्रृति, स्मृति, मनुस्मृति, दासबोध,
४ वेद, १८ पुरान, ६४ शास्त्र वा बहुजन संतों के अभंग वाणी, गाथा, दोहे कि�

Friday, 12 January 2018

ISLAM ME AURAT KA MAQAM

ISLAM ME AURAT KA MAQAM



★ AURAT KA MAQAAM ★ – ★ AURAT KA MAQAAM ★
1) Aurat Khuda ka diya hua ek Naayaab tohfa hai..

2) Pregnant aurat ki 2 rakat Namaaz aam aurat k 70 rakat Namaaz se badkar hai.

3) Husbnd pareshan ghar aye aur biwi use tasalli de to use Jehad ka sawaab milta hai.

4) Jo aurat apne bachche k rone ki wajah se so na sake use 70 gulam azaad karne ka sawaab milta hai.

5) Shauhar or Biwi ek dusre ko mohabbat ki nazar se dekhe to Allah unhe mohabbat ki nazar se dekhte hai..

6) Jo aurat apne shohar ko Allah k raste me bheje,vo Jannat me apne shohar se 500 saal pehle jayegi..

7) Jo aurat Aataa goondhte waqt Bismillah padhe,to uske Rizk me Barakat daal di jaati hai..

8) Jo aurat ghair mard ko dekhti hai,Allah us par laanat bhejte hai..

9) Jab koi aurat delivery k 40 days k andar mar jaati hai to use Shahadat ka martaba diya jaata hai..

10) Jab aurat apne shouhar k bina kahe unke pair dabati hai,to use 70 tola Sona Sadaka karne ka sawaab milta hai..

11) Jo paak daaman aurat Namaaz Roze ki paband ho,or jo shouhar ki khidmat kare,uske liye Jannat k 8 darwaze khol diye jaate hai.
.
12) Apne shouhar ki na-farmaan aurat ki Ibadat Aasman tak nahi pohochti..

13) Pregnant lady ki har raat Ibadath aur har din Roze me shumaar hai..

14) Ek bachche k paida karne par 75 saal ki Namaaz ka sawaab,aur har ek dard par 1Hajj ka sawaab..

15) Bareek Libaas pehenne wali,gair mard se milne wali, kabhi Jannat me dakhil na hogi.

16) Jannat me sab Allah ka deedar karna chahenge,par jo aurtein duniya me Hijaab karti ho,parde ki paband hoti ho,uske deedar k liye Allah khud khwahishmand hoga..

🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼🌼
ALLAH TAALAH NE AURATON KO BADA HI AALA MAKAAM ATAH KARA HAI CHAHE WO MAA HO ,BEHEN HO YA BIWI HO SABKO ALLAH NEK HIDAYAT ATAH KARE!
Aameen! Frwd to All Muslims.

इस्लाम में नारी का महत्व और सम्मान

               इस्लाम में नारी का महत्व और सम्मान

यदि आप धर्मों का अध्ययन करें तो पाएंगे कि हर युग में महिलाओं के साथ सौतेला व्यवहार किया गया,
* हर धर्म में महिलाओं का महत्व पुरुषों की तुलना में कम रहा। बल्कि उनको समाज में तुच्छ समझा गया, उन्हें प्रत्येक बुराइयों की जड़ बताया गया, उन्हें वासना की मशीन बना कर रखा गया। एक तम्बा युग महिलाओं पर ऐसा ही बिता कि वह सारे अधिकार से वंचित रही।
लेकिन यह इस्लाम की भूमिका है कि उसने हव्वा की बेटी को सम्मान के योग्य समझा और उसको मर्द के समान अधिकार दिए गए।
♥ क़ुरआन की सूरः बक़रः (2: 228) में कहा गया:
“महिलाओं के लिए भी सामान्य नियम के अनुसार वैसे ही अधिकार हैं जैसे मर्दों के अधिकार उन पर हैं।”

∗ इस्लाम में महिलाओं का स्थान –

इस्लाम में महिलाओं का बड़ा ऊंचा स्थान है। इस्लाम ने महिलाओं को अपने जीवन के हर भाग में महत्व प्रदान किया है। माँ के रूप में उसे सम्मान प्रदान किया है, पत्नी के रूप में उसे सम्मान प्रदान किया है, बेटी के रूप में उसे सम्मान प्रदान किया है, बहन के रूप में उसे सम्मान प्रदान किया है, विधवा के रूप में उसे सम्मान प्रदान किया है, खाला के रूप में उसे सम्मान प्रदान किया है, तात्पर्य यह कि विभिन्न परिस्थितियों में उसे सम्मान प्रदान किया है जिन्हें बयान करने का यहाँ अवसर नहीं हम तो बस उपर्युक्त कुछ स्थितियों में इस्लाम में महिलाओं के सम्मान पर संक्षिप्त में प्रकाश डालेंगे।

∗ माँ के रूप में सम्मानः –

माँ होने पर उनके प्रति क़ुरआन ने यह चेतावनी दी कि “और हमने मनुष्य को उसके अपने माँ-बाप के मामले में ताकीद की है – उसकी माँ ने निढाल होकर उसे पेट में रखा और दो वर्ष उसके दूध छूटने में लगे – कि ”मेरे प्रति कृतज्ञ हो और अपने माँ-बाप के प्रति भी। अंततः मेरी ही ओर आना है॥14॥ ”
कुरआन ने यह भी कहा कि – “तुम्हारे रब ने फ़ैसला कर दिया है कि उसके सिवा किसी की बन्दगी न करो और माँ-बाप के साथ अच्छा व्यवहार करो। यदि उनमें से कोई एक या दोनों ही तुम्हारे सामने बुढ़ापे को पहुँच जाएँ तो उन्हें ‘उँह’ तक न कहो और न उन्हें झिझको, बल्कि उनसे शिष्‍टापूर्वक बात करो॥23॥ और उनके आगे दयालुता से नम्रता की भुजाएँ बिछाए रखो और कहो, “मेरे रब! जिस प्रकार उन्होंने बालकाल में मुझे पाला है, तू भी उनपर दया कर।”॥24॥ (सूरः बनीइस्राईल 23-25)
» हदीस: माँ के साथ अच्छा व्यवहार करने का अन्तिम ईश्दुत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने भी आदेश दिया,
एक व्यक्ति उनके पास आया और पूछा कि मेरे अच्छे व्यवहार का सब से ज्यादा अधिकारी कौन है?
आप ने फरमायाः तुम्हारी माता,
उसने पूछाः फिर कौन ?
कहाः तुम्हारी माता.
पूछाः फिर कौन ?
कहाः तुम्हारी माता,
पूछाः फिर कौन ? कहाः तुम्हारे पिता ।
मानो माता को पिता की तुलना में तीनगुना अधिकार प्राप्त है।
» हदीस: अन्तिम संदेष्टा मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः “अल्लाह की आज्ञाकारी माता-पिता की आज्ञाकारी में है और अल्लाह की अवज्ञा माता पिता की अवज्ञा में है”

∗ पत्नी के रूप में सम्मानः –

पवित्र क़ुरआन में अल्लाह तआला ने फरमाया और उनके साथ भले तरीक़े से रहो-सहो। (निसा4 आयत 19) और मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः “एक पति अपनी पत्नी को बुरा न समझे यदि उसे उसकी एक आदत अप्रिय होगी तो दूसरी प्रिय होगी।” – (मुस्लिम)

∗ बेटी के रूप में सम्मानः –

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः “जिसने दो बेटियों का पालन-पोषन किया यहां तक कि वह बालिग़ हो गई और उनका अच्छी जगह निकाह करवा दिया वह इन्सान महाप्रलय के दिन हमारे साथ होगा” – (मुस्लिम)
आपने यह भी फरमायाः “जिसने बेटियों के प्रति किसी प्रकार का कष्ट उठाया और वह उनके साथ अच्छा व्यवहार करता रहा तो यह उसके लिए नरक से पर्दा बन जाएंगी” – (मुस्लिम)

∗ बहन के रूप में सम्मानः –

मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः “जिस किसी के पास तीन बेटियाँ हों अथवा तीन बहनें हों उनके साथ अच्छा व्यवहार किया तो वह स्वर्ग में प्रवेश करेगा” – (अहमद)

∗ विधवा के रूप में सम्मानः –

इस्लाम ने विधवा की भावनाओं का बड़ा ख्याल किया बल्कि उनकी देख भाल और उन पर खर्च करने का बड़ा पुण्य बताया है।
मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः ”विधवाओं और निर्धनों की देख-रेख करने वाला ऐसा है मानो वह हमेशा दिन में रोज़ा रख रहा और रात में इबादत कर रहा है।” – (बुखारी)

∗ खाला के रूप में सम्मानः –

इस्लाम ने खाला के रूप में भी महिलाओं को सम्मनित करते हुए उसे माता का पद दिया।
हज़रत बरा बिन आज़िब कहते हैं कि अल्लाह के नबी (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) ने फरमायाः
“खाला माता के समान है।” – (बुखारी)

Thursday, 11 January 2018

Australia Facts (ऑस्ट्रेलिया के बारे में रोचक तथ्य)

                                   ऑस्ट्रेलिया के बारे में रोचक तथ्य


चमकीली रेत, दूर-दूर तक फैला नीला समंदर, और शानदार मौसम या फिर उछलते-कूदते कंगारुओं के बीच जंगल की सैर या दुनिया के सात प्राकृतिक अजूबों में शामिल ग्रेट बैरियर रीफ़ की रंग-बिरंगी रोमांचक पानी की दुनिया में या समुद्र के किनारे बने बेहतरीन ओपेरा हॉउस में एक शो देखने… और अगर हम कहें, कि आपके ख्व़ाब की कोई एक बात नहीं, बल्कि पूरा सपना ही सच हो सकता है। जी हां, चौंकिए नहीं ! आपके ख़्वाबों से भी सुंदर है ऑस्ट्रेलिया ..यहां वो भी मिलेगा, जो आपने कभी सोचा ना होगा। इसलिए तो कहते हैं ‘देयर इज़ नथिंग लाइक ऑस्ट्रेलिया’। 

Australia Facts In Hindi
ऑस्ट्रेलिया के बारे में रोचक तथ्य

1. ऑस्ट्रेलिया, लंदन से मॉस्को के बीच की दूरी जितना बड़ा है।
2. ऑस्ट्रेलियाई हर साल औसतन 96 लीटर बीयर गटक जाते हैं।
3. अकेले आस्ट्रेलिया द्वारा हर साल 1.35 खरब शराब की बोतलें बनाई जाती है।
4. आस्ट्रेलिया मे एक वर्ष मे पैदा हुयी ऊन से स्कार्फ बुना जाये तो वह इतना बडा हो जायेगा कि पूरे विश्व को उसमे सौ बार लपेटा जा सकता है।
5. Australia के 91% भाग पर वनस्पति है यह 7 लाख वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है।
6. दुनिया में Australia को खेल की राजधानी कहाँ जाता है। यहाँ की 70 प्रतिशत जनसंख्या हर हफ्ते किसी न किसी खेल में भाग लेती है।
7. पूरी दुनिया में बिजली के सबसे ज्यादा दाम आस्ट्रेलिया में है। और यहाँ के कानून इतने जबरदस्त है की आस्ट्रेलिया के विक्टोरिया में केवल लाइसेंस प्राप्त मिस्त्री ही बल्ब बदल सकता है।
8. ऑस्ट्रेलिया में दुनिया का सबसे लंबा फेंस (बाड़) है। यह 5,614 किमी लंबा है। जंगली कुत्तों से उपजाऊ जमीन को बचाने के लिए इसे बनाया गया था।
9. मेलबर्न में गंदे गीत गाने पर सजा का प्रावधान है। हालांकि, शर्त यह है कि अगर आप ऐसा कोई गीत गाते हैं तो इसकी आवाज दूसरे के कानों तक नहीं पहुंचनी चाहिए। इसके लिए 6 महीने की सजा हो सकती है।
10. 25% से ज्यादा Australians किसी और देश में पैदा हुए है।
11. बीयर पीने का World Record आस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री बाॅब हाॅक के नाम है उन्होने 11 सैकेंड में 2.5 pints(1.18 Litre) बीयर पी कर World Record बनाया था।
12. 1880 में मेलबर्न दुनिया का सबसे धनी शहर था।
13. हमारें देश में फिल्मों में जब चाहे बारिश करवा लेते है लेकिन मेलबर्न में एक खास कानून है जिसके तहत आर्टिफिशियल बारिश नहीं कराई जा सकती। रेन मेकिंग कंट्रोल एक्ट 1966 में ही बना दिया गया था।
14. आस्ट्रेलिया में 15 करोड़ से ज्यादा भेड़ है और केवल 2 करोड़ लोग है यहां हर व्यक्ति के लिए 8 भेड़ है।
15. आस्ट्रेलिया में गुलाबी रंग की ‘Hillier’ झील है। वैज्ञानिक आज तक इस बात का पता नही लगा सके कि इसका रंग गुलाबी क्यों है ?
16. सऊदी अरब मीट के लिए ऑस्ट्रेलिया से ऊंटों का आयात करता है।
17. क्या आपको पता है ऑस्ट्रेलिया में कितने बीच हैं? नहीं। ऑस्ट्रेलिया में 10000 के आस-पास बीच हैं। इसका मतलब यह है कि आप 27 साल तक रोजाना एक नए बीच का भ्रमण कर सकते हैं।
18. 1902 से पहले यहां दिन के वक्त समुद्री तटों पर तैरना गैरकानूनी था।
19. ऑस्ट्रेलिया में 200 से ज्यादा अलग-अलग भाषाएं और बोली सहित 45 देशी भाषा बोली जाती हैं।
20. मेलबर्न लगातार तीसरे साल विश्व के सर्वाधिक रहने योग्य शहर में पहले पायदान पर है।
21. Australia में कंगारूओ की संख्या लोगो की संख्या से ज्यादा है।
22. मेलबर्न को फॉक्स कैपिटल भी कहा जाता है। दरअसल, यहां लोमड़ियों की काफी आबादी है। हर स्क्वॉयर किलोमीटर पर करीब 10 लोमड़ी पाई जाती है। कई बार यह लोगों के लिए परेशानी भी पैदा करता है।
23. 2013 में, ऑस्ट्रेलिया में एक सुअर ने 18 बीयर पी ली और नशे में इतना धुत हो गया था कि एक गाय से लड़ने की कोशिश करने लगा।
24. Australia में 1979 के बाद मकड़ी के काटने से कोई मौत नही हुई।
25. सीट बेल्ट कानून 1970 में सबसे पहले आस्ट्रेलिया के विक्टोरिया में लागू हुआ था।
26. महिलाओं को मतदान का अधिकार देने वाला ऑस्ट्रेलिया दूसरा देश था। इसे 1902 में लागू किया गया था।
27. 85 फीसदी से ज्यादा ऑस्ट्रेलियाई समुद्री तट से 50 किमी के दायरे में निवास करते है।
28. मजेदार बात ये है कि एक आस्ट्रेलियाई व्यक्ति ने एक बार ebay पर न्यूजीलैंड को बेचने की कोशिश की थी।
29. स्विटजरलैंड की तुलना में ऑस्ट्रेलिया के आल्प्स पर्वत पर सबसे ज्यादा बर्फबारी होती है।
30. 1984 तक ऑस्ट्रेलिया का राष्ट्रीय गान ‘गॉड सेव द किंग/क्वीन’ था।
31. किसी भी देश की तुलना में ऑस्ट्रेलियाई जुआ खेल कर अधिक पैसे खर्च करते हैं।
32. हैन्कॉक प्रॉस्पेक्टिंग ग्रुप की चेयरमैन गिना रिनेहार्ट ऑस्ट्रेलिया की सबसे दौलतमंद महिला हैं। उनके हर घंटे की कमाई एक मिलियन डॉलर (6 करोड़ रु से ज्यादा) है।
33. मेलबर्न के कानून के मुताबिक किसी सामान के खो जाने के बाद उसे लौटाने के लिए इनाम की घोषणा करना गैर कानूनी है।
34. ऑस्ट्रेलिया में ही दुनिया का सबसे पुराना जीवाश्म पाया गया था। यह लगभग 340 करोड़ साल पुराना है। यह एकमात्र महाद्वीप है, जहां एक भी सक्रिय ज्वालामुखी नहीं है।
35. दुनिया में सबसे ज्यादा जहरीले सांप ऑस्ट्रेलिया में पाए जाते हैं।
36. पूरी दुनिया में इस्तेमाल किया जाने वाला फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर यानी ब्लैक बॉक्स का आविष्कार मेलबर्न में ही हुआ था। इसे डेविड वारेन ने एरोनॉटिकल रिसर्च लेबोरेटरी में 1958 में बनाया था। दरअसल, वारेन के पापा की मौत एक प्लेन क्रैश में ही हो गई थी, जिसके बाद उन्होंने प्लेन के आखिरी वक्त की जानकारी सामने लाने के लिए ब्लैक बॉक्स बनाने का फैसला किया।

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