•हिंदू शब्द का सच्चा इतिहास •
हिंदू यह भारतीय मातृभाषा गुजराती, मराठी शब्द नही,
हिंदी भी नही वैसे यह
संस्कृत भी नही,
ईंग्लिश भी नही
मगधी भी नही एवं यह शब्द भारतीय भाषा समुदाय का भी नही..
यह शब्द "परशियन" "फारशी" शब्द है..
इ.स. १२वीं शताब्दी में मुगल जब भारत में आए. उनकी बोली भाषा व लिपी 'परशियन' 'फारशी' थी.
भारत में आकर जब उन्होंने भारतीयों को, भारत के तिलकधारी, तलवार धारी व व तराजुधारी लोगों को हराया तब उन्होंने हारे हुए लोगों को "हिंदू" यह तुच्छास्पद गाली देकर नवाजा तब से आजतक "हिंदू" शब्द प्रचलित हुआ.
{ भारत के पश्र्चिम बंगाल राज्य की राजधानी कलकत्ता में विशाल पुस्तकालय लायब्ररी में परशियन डिक्शनरी है उसमें "हिंदू" शब्दा का अर्थ आप भी देख सकते हैं.}
( Analysis of हिंदु:-
परशियन डिक्शनरी में "हिंदू" शब्दा का अर्थ
हिनदू = गुलाम, चोर, पसीने की बदबू वाला, काले मुख वाला.
"हिंदू" यह शब्द दो शब्दा का बना हुआ नहीं तीन शब्दा का {हि+न+दू} एसा है जिसका अपभ्रंश होकर दो शब्द "हिंदू" एसा हो गया है.)
< दयानंद सरस्वती स्वयं १८७५ को मान्य करता है व उसके "सत्यार्थ प्रकाश" पुस्तक में 'हिंदू यह मुगलों ने थी हुई गाली हे' एसा लिखा है..
इसके अलावा कि हिंदू समाज की स्थापन न करते हुए, " *आर्य समाज " की स्थापन करता है.>
बाद में "हिंदू" से 'हिंदूस्थान' मुगलो ने ही किया..
( Analysis of हिंदुस्तान :-
हिन = यानिकि तुच्छ, दरिद्र, पसीने की बदबू वाला.
दून= यानाकि लोग, प्रजा, जनता..
स्तान (स्थान)= यानिकि ठिकाना, अता-पता , जागा..)
"भारत" कमी भी 'हिंदूस्थान' नहीं था और नहीं है.
इ.स १२ वीं शताब्दी के पहले "हिंदू" शब्द किसी भी ग्रंथ, बोलने में वा लिखने में नही आया, इसीलिए तो नीचे बताए गये
(ब्राह्मण ग्रंथ - रामायण, महाभारत, उपनिषद, भगवत गीता, ज्ञानेश्वरी, श्रृति, स्मृति, मनुस्मृति, दासबोध,
४ वेद, १८ पुरान, ६४ शास्त्र वा बहुजन संतों के अभंग वाणी, गाथा, दोहे कि�
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